लक्ष्मी सी यदि कोमल है;
तो दुर्गा सी भयहारी है,
राधा का है मृदुल समर्पण;
काली सी प्रलयंकारी है,
पाप भरी लंका जल जाये;
सीता की वो तेजस चिंगारी है,
भगिनी का ले स्नेह अपरिमित;
ममता की वह फुलवारी है,
सृष्टि-चक्र जो चला सके;
विश्व का गौरव नारी है।
*Happy WOMEN’S DAY*
तो दुर्गा सी भयहारी है,
राधा का है मृदुल समर्पण;
काली सी प्रलयंकारी है,
पाप भरी लंका जल जाये;
सीता की वो तेजस चिंगारी है,
भगिनी का ले स्नेह अपरिमित;
ममता की वह फुलवारी है,
सृष्टि-चक्र जो चला सके;
विश्व का गौरव नारी है।
*Happy WOMEN’S DAY*
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